Assam में आरक्षण | 6 Community को ST दर्जा | Massive Protest in Assam

कौन बनेगा ST?

Group of Ministers (GoM) की रिपोर्ट के आधार पर Assam Cabinet ने 27 नवंबर 2025 को छह प्रमुख समुदायों — Tai Ahom, Chutia, Moran, Matak, Koch‑Rajbongshi और Tea Tribes (एडिवासी) को Scheduled Tribes (ST) सूची में शामिल करने की सिफारिश की है। रिपोर्ट का तर्क है कि इन समुदायों में “सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन” है, और वे ST-मैनेजमेंट व आरक्षण के अधिकारों के हकदार हैं।

     कौन-कौन हैं ये छह समुदाय

    1. Tai Ahom
    2. Chutia
    3. Moran
    4. Matak
    5. Koch-Rajbongshi
    6. Tea Tribes (एडिवासी) 

    विरोध क्यों हो रहा है

    कुछ पहले से ST में शामिल समुदाय — खासकर Bodo और अन्य ट्राइबल्स — डरते हैं कि नए जुड़े समुदायों की संख्या और प्रतियोगिता से उनकी आरक्षण व राजनीतिक प्रतिनिधित्व का हिस्सा कम हो जाएगा। Coordination Committee of Tribal Organisations of Assam (CCTOA) और अन्य ट्राइबल संगठनों का कहना है कि यह फैसला “चुनावी राजनीति” से प्रेरित है — और यह मौजूदा ट्राइबल्स की पहचान व अधिकारों के लिए खतरा है। कुछ ने कहा है कि कई मामलों में ये समुदाय “एंथ्रोपोलॉजिकली ट्राइबल” नहीं हैं — उनकी सामाजिक-सांस्कृतिक स्थिति ऐसी नहीं कि उन्हें ST दर्जा मिले। 

      इन समुदायों की माँग — क्यों ST चाहिए?

      इन समुदायों का दावा है कि ब्रिटिश काल या बाद में उनकी “स्वदेशी/आदिवासी पहचान” छिनी गई थी — और अब वह पहचान व अधिकार उन्हें लौटना चाहिए। साथ ही — सामाजिक-आर्थिक पिछड़ापन: गरीबी, भूमि-lessness (landlessness), कामगार वर्ग में रोजगार, शिक्षा व स्वास्थ्य में पिछड़ा स्तर आदि। ST दर्जा मिलने से आरक्षण (शिक्षा व सरकारी नौकरी), संवैधानिक व कानूनी सुरक्षा — जैसे वन अधिकार, क्षेत्रीय स्वायत्तता, सामाजिक कल्याण योजनाओं में हिस्सेदारी — मिल सकेगी।

        स्थिति अब कहाँ है — सरकार व विरोध की प्रतिक्रिया

        Assam सरकार का कहना है कि प्रस्तावित ST (Valley / Plains / Hills) तीन-स्तरीय व्यवस्था के साथ — ताकि मौजूदा STs को कोई नुकसान न हो। पर, विरोध अब खुला — विद्यार्थी, ट्राइबल संगठन, और ST समुदायों ने सड़कों पर उतर कर विरोध जताया। कुछ जगहों पर हिंसा व वैंडलिज्म की घटनाएँ भी हुईं, जैसे कि Bodoland University के छात्रों ने Bodoland Territorial Council (BTC) सचिवालय पर धावा बोला। सरकार अब बातचीत की कोशिश कर रही है।

          निष्कर्ष — क्या सही है, क्या गलत, और आगे क्या होगा

          यह मामला सिर्फ आरक्षण तक सीमित नहीं है — यह “पहचान, अधिकार और संसाधन बाँटने” का है। छह समुदायों का ST-दर्जा पाने का दावा उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति, ऐतिहासिक दावे, और पहचान से जुड़ा है। दूसरी ओर, मौजूदा ट्राइबल्स व उनके प्रतिनिधि इसे “असली आदिवासी अधिकारों” पर हमला और संसाधनों पर बोझ बढ़ने जैसा देख रहे हैं।

          आगे की दिशा तय होगी इस बात पर कि

          सरकार प्रस्ताव को कैसे रूप देती है (तीन-स्तरीय व्यवस्था, आरक्षण की कुल संख्या, संसाधन प्रबंधन), और क्या केंद्रीय स्तर (केंद्रीय मंत्रालय / संसद) से मंज़ूरी मिलती है — क्योंकि ST सूची में शामिल करना संवैधानिक मामला है।